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लू लगने का लक्ष्यण क्या होता है ? और बचाब के लिए घरेलु आयुर्वेदिक उपाय क्या है ?

  लू लगने का लक्ष्यण  क्या होता है ? और बचाब के लिए घरेलु आयुर्वेदिक उपाय क्या है ?   गर्मियों के दिनों मैं अपने देश के कई सहरो मैं तापमान इतना ज़्यादा हो जाता है की घर से बाहर निकलना ही मुश्किल होने लगता है. इन दिनों दो पहर के समय बहार बहुत तेज गर्म हबाए चलती है . इन गर्म हबाओं को ही लू कहते है  या हीट स्ट्रोक कहते है . मजबूत इम्युनिटी बाले लोग इन गर्म हबाओं को सहन कर लेते है लेकिन अधिकांश लोक इन हबाओं को सहन नहीं कर पाते है और इनके संपर्क मैं आते ही बीमार पड  जाते है . अपने देश मैं हर साल काफी बड़ी तादात मैं लोग लू की चपेट मैं आ जाते है .  लू लगने के कारन - ये गर्म हबायें जब आपके सरीर के संपर्क मैं आते है तो सरीर का तापमान बढ़ा देती है और इस बजह से कोई समस्या होने लगती है . ज़्यादा देर तक धुप मैं काम करना और सरीर मैं पानी की कमी होना लू लगने के प्रमुख कारन है . बच्चे और बूढ़े लोग लू की चपेट मैं जल्दी आ जाते है . अधिकांश मामलो मैं लोगो को यह जल्दी पता ही नहीं चल पाता है की उन्हें लू लग गयी है . हालाकि इसका  सटीक अंदाजा लू के लक्ष्यणो को देख कर लगाया जा सक...

धुप मैं स्वस्त और सुरक्षित कैसे रहे ?

 धुप मैं स्वस्त और सुरक्षित कैसे रहे ?   हम दुनिया मैं कही भी रहते हो,सूरज की गर्मी मैं आराम करने और प्रकृति का आनंद लेने का सरल सुख हम मैं से कोई लोगो के लिए एक खुसी है . सूर्य का प्रकाश कई स्वस्त लाभ प्रदान करता है,यह विटामिन डी के उदपा दन  मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,जो स्वस्त हड्डियों,मजबूत प्रतिरक्ष्य  प्रणाली और सकरात्मक मानशिक स्वस्त के लिए आबश्यक है .  हलाकि धुप के फाईदो को प्राप्त करने और सम्भाबित  खतरों मैं खुद को बचाने के बिच संतुलन बनाये रखना महत्वपूर्ण है. सूर्य की हानिकारक पाराबेंगनि  ,किरणों की अत्यधिक संपर्क मैं आने से त्वचा को नुकसान  ,समय से पहले  बुढ़ापा , और त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है . धुप मैं  सुरक्षित और आनंद दायक अनुभब के लिए अपनी त्वचा की सुरक्ष्य और गर्मी से सम्बंधित बीमारियो  के बचाब के तरीके समझना आबश्यक है .  हम सूर्य के प्रकाश के स्वास्त्य लाभों ,अत्यधिक धुप मे  रहने से जुड़े सम्भाबित जोखिमों और धुप मैं सुरक्षित और स्वास्त्य रहने के ब्यबहारिक सुझाबो पर चर्चा करेंगे । चाहे आप समुद्र तट...

क्या होता है हकलाना ?

क्या होता है हकलाना ?  हकलाना एक बाक बिकार है जो बोलनव की लय और प्रबाहा को प्रभाबित करता है . यह बिकार बोलने के तरीके को बाधित करता है . जिसे अनचाही  ध्वनिअ ,बिराम या बोलने मैं अन्य समशया उत्पर्णा होती है .  हकलाने के कुछ अलग अलग प्रकार होते है   बिकासात्मक हकलाहट (बचपन मैं सुरु होने बाला हकलाने का बिकार ) यह एक तंत्रिका -बिकासात्मक बिकार है , जिसे अर्थ है की यह मस्तिक के अपेक्षित बिकाश से भिन्न  तरीके से बिकसित होने के कारन होता है. यह बिकार बचपन से ही सुरु हो जाता है .  लगातार हकलाना - यहा बिकासात्मक हकलाना है जो बयसकता तक जारी रहता है .  अर्जित हकलाहट - यह बह हकलाहट है जो मस्तिक को प्रभाबित करने बाली किसि बीमारी या चोट के कारन बिकसित होती है .  हकलाना एक बिसिस्ट प्रकार का प्रबाहा बिकार है . ये सभी बाक अबरोध की श्रेणी मैं आते है .  हकलाने से कोन  कोन  प्रभाबित होता है ? हकलाहट किसी को भी हो सकती है। लेकिन पुरुसो मैं इसके होने की सम्भाबना चार गुना अधिक होती है . उम्र भी आपके हकलाहट के प्रकार को प्रभाबित कर सकती है .  १ . बिकास...

OCD बीमारी क्या है ?

 OCD बीमारी क्या है ?  मरीजों का अपने बिचारो पर काबू नहीं होता,इलाज मैं परिबार का सपोर्ट जरुरी , ट्रम्प और माईकल जैकों भी इसके शिकार हुए थे .  एक्सपर्ट के मुताबिक , OCD का खुद ही इलाज करना मुश्किल होता है , डॉक्टर की सलाह लेना अच्छा तरीका ।  OCD इंसान की नार्मल लाइफ पर काफी असर डालती है प्रोडक्टिविटी और रिस्तो को प्रभाबित करती  है .  महामारी की सुरुवात के साथ ही हेल्थ एजेंसी  और सरकार संक्रमण से बचने के लिए लोगो को हाथ धोने और सफाई रखने की सलाह दे रही है. अब बे लोग भी किसी भी  चीज छूने या किसी से मिलने के तुरंत बाद हैंड वाश खोजने लगे है . जो पहले सिर्फ खाने की समय हाथ धोते थे.  यह कोरोना के समय मैं नार्मल है . क्यूंकि वैक्सीन नहीं आने तक आप ऐसा कर खुद को काफी हद तक बचा सकते है . लेकिन , कुछ लोग ऐसे भी है जिनके लिए बार बार हाथ धोना या सफाई बनाये रखने के लिए एक ही चीज को कई बार दोहराना नया नहीं है. ये लोग ऑब्सेसिव काम्पलसीव डिसअर्डर (OCD) की बजह से बार बार हाथ धोते है.  क्या है ऑब्सेसिव कमपलसीव डिसआर्डर ? OCD बीमारी मैं दो कॉम्पोनेन्ट हो...

पेरो मैं खुजली क्यों होता है ? और खुजली होने के निम्न लिखित कारण क्या है ?

 पेरो मैं खुजली क्यों होता है ? और खुजली होने के निम्न लिखित कारण क्या है ?   त्वचा पर खुजली होने पर उसे खुजलाना एक सामान्य और स्वभाबिक प्रतिक्रिया है . यह आपके सरीर का आपको यह बताने का तरीका है की आपको कोई चीज़ परेशान  कर रही है.  खुजली के लिए चिकिसकिय सब्द  प्रूरिटस है. हलकी प्रूरिटस एक सामान्य लक्ष्यन है जो सरीर के किसी भी हिस्सों मैं हो सकता है . लेकिन पैर बिसेस रूप से खुजली के प्रति सम्बेदनसील हो सकते है .  त्वचा मैं खुजली होना आम  तर पर कोई बड़ी बात नहीं है , लेकिन कभी - कभी यह किसी गंभीर समस्या का लक्ष्यन हो सकता है . पेरो मैं खुजली के सम्भाबित कारने और कुछ उपायों के बारे मैं अधिक जानने के लिए आगे बढे .  पेरो मैं खुजली के नो सम्भाबित कारन   सुस्क त्वचा - रूखी त्वचा एक आम समस्या है. लम्बे समय तक गर्म पानी से नहाना,कठोर साबुन का इस्तेमाल,कुछ त्वचा सम्बन्धी समस्याएं और अनूपयुक्त जूते  रूखी त्वच का कारन बन सकते है . पेरो के रूखी त्वचा मैं दरारों पड  सकती है,इससे खुजली हो सकती है। क्यूंकि त्वचा मैं मौजूद तंत्रीकाये जलन के प्रति प्रत...

सिस्ट क्यों होता है ?सिस्ट कैसे होता है ? लक्ष्यण कारण और उपचार क्या है ?

 सिस्ट क्यों होता है ?सिस्ट कैसे होता है ? लक्ष्यण  कारण और  उपचार क्या हैं?  सिस्ट क्या होता है ? सिस्ट एक बंद कैप्सूल या थैली   जैसी संरचना होती ही,जो आम तर पर तरल ,अर्ध ठोस या गैसीय पदार्थ से भरी होती है .  सिस्ट आम तर पर सरीर के लग भग किसी भी प्रकार कम ऊतक मैं पाए जाते है , इनका आकर सुखम  से लेकर इतना बड़ा हो सकता है की ये आतंरिक अंगो को बिस्तापित कर सकते है। हलकी सिस्ट सरीर के किसी भी सामान्य थैली जैसी संरचना को भी संदर्भित कर सकते है,लेकिम इस लेख मैं हम ऊपर दी गयी परीभासा का उपयोग करेंगे पर इसे एक असामान्य संरचना मानेगें  ।  ईसिलिए निचे  बताई गयी सिस्ट सरीर के सामान्य अंग नहीं है। इन मैं अलग झिल्ली या सिस्ट के  दीबारे होती है यदि थैली मबाद से भरी हो ,तो इसे आमतर पर फोड़ा मानाजाता है यह सिस्ट नहीं है .  सिस्ट कितने प्रकार के होते  है ?  सिस्ट कई प्रकार के होते है। सिस्ट सरीर मैं लगभग कही भी हो सकते है . (उदाहरण  के लिए ,चेहेरे या सर की त्वचा पर ) सिस्ट पीठ पर ,घुटने के पीछे सिस्ट , बाहो  मैं सिस्ट...

बरसात के मौसम मैं पेरो के उँगलियों के बिच कट जाता है क्यों? घाव और सडन हो जाता है क्यों ?

बरसात के मौसम मैं  पेरो के उँगलियों के बिच  कट जाता है क्यों? घाव और सडन हो जाता है क्यों ?   पेरो के उँगलियाँ बरसात के पानी से सड़ने लगती है और उँगलियों मैं फंगस पड़ने लगती है . इस सडन को दूर करने मैं कुछ तरीके असरदार शाबित हो सकते है .   मनसून के मौसम मैं हबा मैं हुमिडीटी  होती है और हर तरफ कीचड़ और गन्दगी भर जाती है . जो अलग अलग तरह के स्किन इन्फेक्शन का कारण  बनती है . बरसातों मैं खास तर से पेरो के उँगलियों के बिच फंगल  इन्फेक्शन हो जाता है जिस मैं  उँगलियों मैं सडन की दिक्कत होने लगती है .दाने  या फुंसी निकल जाती है ,नाखुनो के अंदर सडन बढ़ती है और कभी - कभी पपड़ी सी भी जम ने लगती है ऐसे मैं बरसातों मैं खास तर से पेरो की सही देख रेख करने की जरुरत होती है। यहां जानिए बो कोन  से तरीके है जिनसे इस इन्फेक्शन को दूर रखा जा सकता है .  पेरो की इन्फेक्शन को कैसे दूर करे   1 . पेरो को गर्म पानी मैं डाल कर सिकाई करे . इस पानी मैं सेम्पु डाले और 15 से 20 मिनट पैर डुबोए रखने के बाद  साफ़ करे,कम से काम हफ्ते मैं एक बार ऐसा करने से पेर इन...

अपेंडिक्स क्यों होता है ?और इसका लक्ष्यण क्या है ?

 अपेंडिक्स क्यों होता है ?और इसका लक्ष्यण क्या है ?  अपेंडीसाइटिस,अपेंडिक्स की सूजन है. अपेंडिक्स एक ऊँगली के आकर की थैली होती है जो पेट की निचले दाहिने हिस्से मैं,जिसे एब्डोमेन भी कहा जाता है ,कोलोन से बहार निकली होती है .  अपेंडीसाइटिस के कारन पेट की निचले दाहिने हिस्से मैं दर्द होता है . हलकी ज़्यादातर लोगो मैं दर्द नावी के आस  पास से सुरु होता है और फिर आगे बढ़ता है . सूजन आगे बढ़ने के साथ-साथ अपेंडीसाइटिस का दर्द आम तर पर बढ़ता जाता है और अत्यंत गंभीर हो जाता है .  बेसे तो किसी को भी अपेंडी साइटिस हो सकता है,लेकिन यहा ज़्यादातर 10 से 30 बार्स के आयु के लोगो मैं होता है अपेंडीसाइटिस का इलाज आमतर पर एंटी बायोटिक्स से किया जाता है और ज्यादातर मामलो मैं अपेंडिक्स को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है .  इसके लक्ष्यन क्या है ?  अपेंडिक्स के लक्ष्यणो मैं निम्नलिखित शामिल हो सकते है .   1 . पेट के निचले हिस्से की दाहिने और अचानक दर्द होना ।  2 . नाभि के आस पास से सुरु होने बाला अचानक दर्द जो अक्सर  पेट की निचले दाहिने हिस्से मैं चला जाता है ....

सांस फूलना क्या है ? सांस क्यों फूलता है ?

सांस फूलना क्या है ? सांस क्यों फूलता है ?   सांस लेना जीबन को बनाये रखनी बालि मुलभुत क्रिय है ,हमारे अस्तित्व के लिए इतनी अन्तर्निहित प्रक्रिया है की इसका  महत्व अक्सर ओन देखा हो जाता है ,जब तक की यह समझौता न हो जाये ,डिस्पेनिया या सांस की तकलीफ,हमारे जीबन मैं सांस लेने की महत्वपूर्ण भूमिका की एक स्पस्ट याद दिलाती है,इस लेख मैं हम डिस्पेनिआ  की  जटीलताओं का पता  लगते है,इसके बिबिध अभीब्यक्तियों ,कारणों  ट्रिगर्स और राहत के लिए राणनीतियों को कबर करते है। आईये बिकार  सुरु करके सुरु करे .  सांस फूलना क्या है ?  डिस्पेनिआ  जिसे आम तर पर सांस की तकलीफ के रूप मैं जना जाता है , साँस लेने मैं तकलीफ या कठीनाई के एक ब्यक्तिपरक अनुभूति है . सांस फूलने हबा की कमी या अपर्याप्त बायु प्रबाहा की अनुभूति की बिसेसता बाले डिस्पेनिआ  स्वसन या हृदय प्रणाली को प्रभाबित करने बाली कई अन्तर्निहित स्तितियों , अनिमिआ , कम ( हिमो ग्लोबिन )के साथ  साथ शारीरिक परिश्रम चिंता डी  कंडीसनिंग (कम सहन शक्ति ) या परयाबरनिय प्रभाबो जैसे कारको के परिणाम स्वरु...

इन्सेक्ट फोबिया किट भय का निदान कैसे किया जाता है ?

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 इन्सेक्ट फोबिया किट भय का निदान कैसे किया जाता  है ?  यदि किट भय ( एटोमोफोबिया ) आपके जीबन को प्रभाबित करता है , तो आपका स्वस्त सेबा प्रदाता आपको किसि मानसिक , स्वास्त्य पेसेबर,जैसे की मनोबैज्ञानिक से  परामर्ष लेने की सलाह दे सकता है . अमेरिकन साइक्रियाट्रिक एसोसिएशन की मानसिक बिकारो के निदान और सांख्यिकी नियमाबलि ( डीएसएम ) किट भय को एक फोबिया के रूप मैं मान्यता नहीं देती है . लेकिन एक मनोबैज्ञानिक आपके लक्ष्यणो के बारे मैं पुछने के बाद आपको इस रोग से पीड़ित बता सकता है .   यदि आपको कीड़ो से डर लगता है,तो संभबत :आपको बिसिस्ट फोबिया  सम्बन्धी बिकार है .   1 . यह तब होता है जब आप कीड़ो के बारे मैं सोच ते है या उन्हें देखते है .  2 . इस से आप पार्क जाने या हाईकिंग पर जाने जैसी स्तितियों से बच ने लगते है .  3 . इसकी बजह से आप सामाजिक कार्योंक्रमो मैं शामिल नहीं हो पाते .  4 . यह आपके जीबन का आनंद लेने की क्षमता को प्रभाबित करता है .  5 . यह चिंता या भय के ऐसे लक्ष्यन उत्त्पर्ण करता है जो बास्तबिक खतरे से मेल नहीं खाते  ।  6 . ...

कीड़ो को क्यों डर लगता है ? कीड़ो का फोबिया क्यों होता है ?

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कीड़ो को क्यों डर लगता है ? कीड़ो का फोबिया क्यों होता है ?   किट भय( एटोमोफोबिया )कीड़ो का डर है . इस भय से पीड़ित लोगो कीड़ो के बारे मैं सोचना या उन्हें देखने पर बेचेंन  हो जते है . कोई लोगो को कीड़े से जुड़े दर्दनाक अनुभब हुए होते है . एक्सपोज़र थरेपी । कोग्निटिव बिहेबियरल थेरेपी और हिन्नोथेरेपी जैसी कई चिकिस्या पद्धतियों से इस भय को दूर किया जा सकता है .   किट भय क्या है ? किट भक्की भय से ग्रस्त लोगो को कीड़ो से डर  लगता है . ऐसे ब्यक्ति को कीड़े ,मकोड़े, को देखने या उनके बारे मैं सोचने पर अत्यधिक  चिंता या भय हो सकता है . बे बहार टहलने या बयांम करने से बच सकते है . और भरी कार्य क्रम से दूर रह सकते है . कुछ लोगो कीड़ो को देखने की सम्भाबना को कम करने के लिए घर  से बाहर  निकलना ही बंद कर देते है .   किट भय (एटोमोफोबिया ) के अन्य  नाम क्या है ?  किट भय को अन्य नामो से भी जाना जाता है . आप इस भय को इन नामो से भी सुन सकते है .  1 . एकारोफोबिआ ( गर्मी से डर )  2 . कीड़ो से डर ( इंसेक्टोफोबिया )    फोबिया क्या होता है ?   फोबिय...

पार्किंनसन रोग का निदान कैसे किया जाता है ?

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पार्किंनसन रोग का निदान कैसे किया जाता है ?  पार्किंसन रोग का निदान मुक्ष्य रूप से एक नैदानिक प्रक्रिया है ,जिसका अर्थ है की यहकाफी हद तक स्वास्त्य सेबा प्रदता द्वारा आपके लक्ष्यणो की जाँच,प्रश्न पूछने और आपके चिकिस्या इतिहास  की  समीक्ष्य पर निर्भर करता है . कुछ नेदानीक और प्रयोग शाला परीक्ष्यंन सम्भब है,लेकिन इनका आबश्यकता आम तर पर अन्य स्तितियों या बिसिस्ट कारनो  को ख़ारिज करने के लिए होती है .  लेकिन ज़्यादातर प्रयोग शाला परीक्ष्यंण  तब तक आबश्यक नहीं होते जब तक की आप पारकिंसन रोग के उपचार के प्रति प्रति क्रिया न दे , जो किसी अन्य स्तिति का संकेत हो सकता  है .  इस स्तिति का निदान करने के लिए कोन  -कोन  से परीक्ष्यंण  किये  जायेंगे? जब स्वास्त्य सेबा प्रदाताओं को पार्किनसन रोग का संदेह होता है या अन्य स्तितियों को ख़ारिज करने की आबश्यकता होती है , तो बिभीन्न इमेजिंग और नैदानिक परीक्ष्यण  सम्भब है. इन मैं शामिल है   1 . रक्त परीक्ष्यंण  (ये पार्किंसन के अन्य रूपों को ख़ारिज करने मैं मदत कर सकती है) .  2 . कंप्...

पार्किंसन रोग क्या है?कैसे होता है पार्किंसन रोग ?

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 पार्किंसन रोग क्या है?कैसे होता है पार्किंसन रोग ?  पार्किंसन रोग उम्र से सम्बंधित एक मस्तिक  की अपक्षयी बीमारी है ,जिसका अर्थ  है की यह मस्तिक के कुछ हिस्सों को ख़राब कर देती है . यह धीमी गति , कम्पन , संतुलन सम्बन्धी समस्याओं और अन्य लक्ष्यणो के लिए जानि जाती है . अधिकांस  मामले अज्ञात करने से होते है . लेकिन कुछ आनुबंसिक होते है , यह बीमारी ला इलाज  है , लेकिन इसके कई उपचार बिकल्प उपलब्ध  है .  पार्किनसोन रोग क्या है ?  पार्किंसन रोग एक ऐसी स्तिति है जिस मैं मस्तिक का एक हिस्सा धीरे - धीरे ख़राब होने लगता है,जिसे समय के साथ लक्ष्यन और भी गंभीर हो जाते है . यह रोग मुक्ष्य रूप से मांस पेशियों पर नियंत्रण , संतुलन , और गति को प्रभाबित करने के लिए जाना जाता है,लेकिन यह आपकी इन्द्रियों , सोच ने की  क्षयमता , मानसिक स्वास्त्य और अन्य कोई चीजों पर भी ब्य्पक  प्रभाब डाल सकता है.    इसे किसे फर्क पड़ता है ?  पार्किंसन रोग होने का खतरा उम्र के साथ स्वभाबिक रूप से बढ़ता है , और इसके सुरु होने को औसत उम्र 60 बर्स है यह पुरुसो म...

ठंडे सीजन मैं कौन सा पानी नहाना चाहिए ठन्डे या गर्म पानी ?

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 ठंडे  सीजन मैं कौन सा पानी नहाना चाहिए ठन्डे या गर्म पानी ? ठण्ड का मौसम आते ही सुबह कोई लोग एक सबाल से जूझते है की नहाना है भी या नहीं ?  अगर हिम्मत कर के नहाने  का मन बना  भी लिया ,तो अगला सबाल सामने होता है गर्म पानी से नाहये या ठंडा  पानी से .  कई लोग कहते है,ठण्ड मैं गर्म पानी नहाना बेहतर है ,उनका कहना है की इसे सरीर को राहत मिलती है . थकान उतर जाती है और ठण्ड से बचाब होता है .  लेकिन दूसरी तरफ  कुछ लोगो ये भी मानते है की गर्म पानी से नहाना  स्किन को ड्राई कर देता है . बालो को नुक्सान पहुंचता है और सरीर की नेचुरल आयल लेयर ख़त्म कर देता है .  तो आखिर सच्चाई क्या है ? की हमें हर मौसम मैं ठन्डे पानी से नहाना चाहिए या ठण्ड मैं गरम  पानी से नहाना बेहतर है ?  आईये जानते है क्या कहते बीसेसज्ञ ?   इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ साइंटिफिक रीसर्च एंड इंजीनियरिंग  डेवलपमेंट मैं  2022 मैं  छपी एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक सरीर के बाहरी सतह पर केरेटिन सेल्स होती है .  गर्म पानी से नहाने पर इन सेल्स  को नुकसान पहु...