क्या होता है हकलाना ?
क्या होता है हकलाना ?
हकलाना एक बाक बिकार है जो बोलनव की लय और प्रबाहा को प्रभाबित करता है . यह बिकार बोलने के तरीके को बाधित करता है . जिसे अनचाही ध्वनिअ ,बिराम या बोलने मैं अन्य समशया उत्पर्णा होती है .
हकलाने के कुछ अलग अलग प्रकार होते है
बिकासात्मक हकलाहट (बचपन मैं सुरु होने बाला हकलाने का बिकार ) यह एक तंत्रिका -बिकासात्मक बिकार है , जिसे अर्थ है की यह मस्तिक के अपेक्षित बिकाश से भिन्न तरीके से बिकसित होने के कारन होता है. यह बिकार बचपन से ही सुरु हो जाता है .
लगातार हकलाना - यहा बिकासात्मक हकलाना है जो बयसकता तक जारी रहता है .
अर्जित हकलाहट - यह बह हकलाहट है जो मस्तिक को प्रभाबित करने बाली किसि बीमारी या चोट के कारन बिकसित होती है .
हकलाना एक बिसिस्ट प्रकार का प्रबाहा बिकार है . ये सभी बाक अबरोध की श्रेणी मैं आते है .
हकलाने से कोन कोन प्रभाबित होता है ?
हकलाहट किसी को भी हो सकती है। लेकिन पुरुसो मैं इसके होने की सम्भाबना चार गुना अधिक होती है . उम्र भी आपके हकलाहट के प्रकार को प्रभाबित कर सकती है .
१ . बिकासत्मक हकलाहट हमेशा बचपन की समस्या होती है . यह 2 साल की उम्र से लेकर 7 साल की उम्र तक सुरु हो सकती है . इसके सुरु होने की असत उम्र 3 साल से है . और 95 % बच्चे 4 साल की उम्र से पहले ही हकलाना सुरु कर देते है .
२ . लगातार हकलाना एक ब्यस्क समश्या है जो बचपन मैं सुरु होती है .
३ . हकलाने की समस्या किसि भी उम्र के लोगो को प्रभाबित कर सकती है . मस्तिक के कुछ हिस्सों को नुक्सान पहूचने बाली चोटे या स्तितियों के कारण ऐसा होने की सम्भाबना अधिक होती है .
यह स्तिति कितनी आम है
बचपन मैं हकलाने की सामाश्य 1 % से 2 . 4 % बच्चो को प्रभाबित करती है। बयस्को मैं यह समस्या लगभग 0 . 3 % से 1 % तक बनी रहती है . यह शोध सिमित है की हकलाने की समस्या कितनी आम है .
लक्ष्यन और कारण
हकलाने के लक्ष्यन क्या है ?
बोलने के लिए चेहरे , मुह , गले , छाती और पेट की मानस पेशियों के बिच समन्युय आबश्यक है . हकलाने से बोलने के लिए इस्तेमाल होने बलि मानसपेशियो मैं अनियंत्रित हलचल या ऐठन हो सकती है .
हकलाने के आधिकारिक मानदंडों मैं साथ प्रमुख लक्ष्यन शामिल है,और किसी स्वस्थ्य सेबा प्रदाता द्वारा इसका निदान करने के लिए आप मैं इन मैं से कम से कम एक लक्ष्यन होना आबश्यक है .
१ . ध्वनियों या अक्षयरो को दोहराना - यह आम तर पर सब्द के पहले अक्षर पर होता है। आप ध्वनि या अक्षर को तब तक दोहराते है जब तक आप पूरा स्तब्ध न बोले और फिर बोलना जारी रखे.
२ . किसी बिसेस अक्षर या ध्वनि को खींच कर रखना - यह तब होता है जब आप किसी ध्वनि या अक्सर पर अटक जाते है और उसे इच्छानुसार अधिक देर तक खीचते है .
३ . स्तब्ध के बिच मैं रुकना - यह तब होता है जब आप किसी स्तब्ध के बिंदु पर काफी देर तक रुकते है जहा रुकने की आबश्यकत नहीं होती है .
४ . अबरोध - यह बोलते समय बार - बार रुकना है -चाहे चुप चाप या किसी आबाज के साथ (जैसे उम या आह)इसका नाम इस अनुभूति से जुड़ा है की ऐसा लगता है जैसे कोई चीज आपके सब्दो के प्रबाहो को रोक रही है .
५ . सब्द बदलना - यह तब होता है जब आप किसी सब्द या बाक्यांष पर अटक जाते है और उसे बचने के लिए किसी दूसरे सब्द या बाकयंस का प्रयोग करने लगते है .
६ . अति तनाब - इसका मतलब है की आप किसी सब्द के किसी भाग या पुरे सब्द पर बहुत अधिक जोर या तनाब डालते है .
७ . एक अक्सर बाले सब्दो को दोहराना - इसका अर्थ है ऐसे सब्द को दोहरान जिस मैं केबल एक ही ध्वनि हो ,जैसे आई या द
हकलाने का कारन क्या है ?
बीसे सज्ञा अभी तक पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए है की हकलाने की समस्या क्यों होती है . हालाकि , उनका मन्ना है की इसमें कई कारक योग दान दे सकते है .
१ . पारीबारीक़ इतिहास - यदि आपके किसि करीबी रिस्तेदार (माता , पिता , या भाई ,बहन )को हकलाने की समस्या है , तो आपको भी हकलाने की समस्या होने की संभा बना तीन गुना अधिक होती है .
२ . अनुबंसिक - DNA उत परिबर्तन हकलाने मैं योग दान दे सकते है। ऐसा प्रतीत होता है की अनुबंसिकी इस बात को भी प्रभाबित करती है की यह स्तिति समय के साथ सुधरती है या गायब हो जाती है .
३ . मस्तिक संगरचना मैं अंतर - हकलाने बाले लोगो मैं मस्तिक के कुछ खेत्रो मैं अंतर होने की सम्भाबना अधिक होती है . ये आम तर पर बे खेत्र होते है जो बोलने बाली मानसपेशियों या मांसपेशियों के समानुया को नियंत्रित करते है .
निदान और परीक्ष्यंण
हकलाने का निदान कैसे किया जाता है?
हकलाहट का निदान करने बाला डॉक्टर सबसे पहले इस संशय का लक्ष्यन को सुनने की कोसिस करेंगे । बे आपसे या आपके बच्चे से आपके स्वास्त्य इतिहास ,लक्ष्यणो की सुरुवात कब हुई और बे आम तर पर कब होते है . इसके बारे मैं भी पूछेंगे ।
आपके बच्चे के बाल रोग बीसेसज्ञ अक्सर उसके हकलाने का निदान करेंगे । ऐसा आम तर पर तब होता है जब आप लक्ष्यणो को नोटिस करते है और उनका जिक्र करते है , या जब आपके बच्चे के बालरोग बिसेसग्य जांच के दौरान लक्ष्यणो को नोटिस करते है .
लगातार हकलाने बाले अधिकांश लोगो को बचपन मैं ही बिकासत्मक हकलाने का निदान मिलजाता है . हलाकि , यह सम्भब है -हालाकि दुर्लभ है -की लगातार हकलाने बाले बयस्को को बचपन मैं औपचारिक निदान न मिला हो।
बीकासत्मक हकलाहट या लगातार हकलाहट का निदान करने के लिए आम तर पर चिकिशय परिक्षयानो की आबश्यकता नहीं होती है .
हकलाने का इलाज कैसे किया जाता है ?
हकलाहट के सभी रूपों के लिए बाक चिकिस्या मुख्य उपचार पद्धति है . बच्चो मैं ,इस मैं ऐसी गति बिधियाँ सिखाई जाती है जो हकलाहट के लक्ष्यणो को धीरे धीरे कम करने मैं मदत करती है,जब तक की बे पूरी तरह से ठीक न हो जाये . बाक चिकिस्या की गति बिधियाँ और तकनीकी हकलाहट के प्रकार , लक्ष्यणो और गंभीरता पर निर्भर करती है . चिकिशय की आबृति और सत्र की अबधि भी महत्व पूर्ण भूमिका निभाती है .
हकलाने के इलाज के लिए दबाव का सीधा उपयोग आम नहीं है। हलाकि दबाव से चिंता या अबसाद जैसी मानसिक स्वास्त्य समस्याओं का इलाज किया जा सकता है . जो अक्सर हकलाने के साथ होती है और इस मैं योग दान देती है। अबासाद की दबाएं (एंटीडिप्रेसेंट) और चिंता रोधी दबाएं इस तरह इस तेमाल की जाने बलि दबाओ के उदाहरण है .
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